कुट्टू के आटे की पकौड़ी – Kuttu ke Pakore – Kuttu Atta Recipes

reena gupta By Reena Gupta, On

कुट्टू के आटे की पकौड़ी या कुट्टू के पकोड़े अथवा व्रत के पकोड़े – यह फलाहारी व्यंजन कुट्टू के आटा और मसले हुए उबले आलू या कच्चे आलू के साथ डीप फ्राई करके बनाया जाता है।

कुट्टू के आटे की पकौड़ी उत्तर भारत का प्रसिद्ध फलाहारी स्नेक है। व्रत उपवास में चाय और हरे धनिये की चटनी के साथ यह कुरकुरी पकोड़ी हर एक घर में खायी जाती हैं।

कुट्टू के पकोड़े बनाने में आसान और खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगते हैं, प्रत्येक व्रत उपवास में खाने योग्य यह पकोड़ी शनिवार व्रत आहार मे बहुत लोकप्रिय हैं। shaniwar ko kya khana chahie

कुट्टू का आटा ही व्रत का आटा कहलाता है, कूटू को अंग्रेज़ी में बकव्हीट (buckwheat) बोलते हैं और पंजाबी में इसे ओखला कहा जाता है। ग्लूटिन फ्री होने के कारण kuttu ka atta सेवन के बहुत फायदे है।

आइये जानते हैं आवश्यक सामग्री, उपयोगी सुझाव और कुट्टू के आटे की पकौड़ी कैसे बनाते हैं….

 kotu ke pkode

कुट्टू के पकोड़े बनाने की सामग्री:-

  • कुट्टू का आटा (Buckwheat Flour) – 1 कप
  • आलू (Potato) – 5-6
  • लाल मिर्च पाउडर/ पिसी मिर्च (Red chilli ) – 1/2 चम्मच
  • गरम मसाला पाउडर (Garam Masala) – 1/2 चम्मच
  • हरी मिर्च बारीक कटी हुई (Green Chilli ) – 2
  • हरा धनिया बारीक कटा हुआ (Coriander) – थोड़ा सा
  • सेंधा नमक / लाहौरी नमक (Rock salt) – स्वादानुसार
  • खाद्य तेल या शुद्ध घी (Edible oil or pure ghee) – पकोड़े तलने के लिए

कुट्टू के पकोड़े बनाने की विधि:-

 vrat ki pkodi step 1

सबसे पहले कच्चे आलू को धो कर आलू का छिलका उतार लीजिये।

 vrat ki pkodi step 2

छिले हुए आलुओं के गोल आकार में पतले स्लाइज काट लीजिये। कटे हुए आलू के पीसों को पानी में भिगो दीजिये जिससे आलू काले नही पड़ेंगे।

 vrat ki pkodi step 3

एक बड़ी बाउल में कोट्टु का आटा पलटिए उसमें हरी मिर्च, हरा धनिया, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला और सेंधा नमक मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पानी मिक्स करते हुए गाड़ा घोल बना लीजिये।

 vrat ki pkodi step 4

कटे हुए आलू के पीसों को कुट्टू आटे के घोल में डाल कर अच्छे से मिक्स कर लीजिये।

 vrat ki pkodi step 5

एक पेन या कढ़ाई में शुद्ध घी गर्म कीजिये, उसमें कोट्टु की आटे में डिप किये हुए आलू के पीस एक-एक करके छोड़िये।

 vrat ki pkodi step 6

कोट्टु के पकोड़ों को उलट-पलट करके ब्राउन होने तक तल लीजिये और एक प्लेट में पेपर नैपकिन बिछाकर उसमे तले हुए पकोड़े निकाल लीजिये।

कच्चे आलू के कुटू के पकोड़े तैयार है, इनको हम हरी चटनी और दही के साथ खा और सर्व कर सकते है।

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उपयोगी सुझाब:

आइये जानते हैं कुछ ऐसे Tips जो की कुरकुरे Kuttu ke Pakore बनाने और सर्व करने में निश्चित ही आपको उपयोगी लगेंगे….

कुट्टू के पकोड़े का बेटर बनाना :-

पकोड़ी का बेटर केक या इडली के बेटर की तरह टाइट होना चाहिये क्योंकि एक तो पतले बेटर से कूटू का घोल आलुओं पर अच्छे से चिपक नहीं पाता और दूसरा पकोड़े फ्राई होते समय घी भी ज्यादा पीते हैं।

अगर आप उबले आलू से कुट्टू की पकोड़ी बना रहे हैं तब भी बेटर को गाढ़ा ही बनायें जिससे आप अपने हाथों से पकोड़ों को आसानी से आकार दे सकें।

व्रत के पकोड़े के स्वाद में बदलाव सम्बन्धी सुझाव :-

आप स्वादानुसार पकोड़े के मिश्रण में दरदरी कुटी हुई मूंगफली और सूखे अनार का पाउडर (अनारदाना पाउडर) मिक्स करके पकोड़े बनाइये फिर देखिये सभी इनके क्लासिक स्वाद को कितना पसंद करेंगे।

कोट्टु के घोल में मैश किए उबले आलु और कद्दूकस किया कद्दू (pumpkin) को मिला कर पकोड़े फ्राई कीजिये, यह फोके-फोके पकोड़े निश्चित ही सबको बहुत पसंद आयेंगे।

कोट्टु की पकोड़ी सर्व करने के सुझाव :-

कुट्टू के आटे की तासीर गर्म होती है इसलिए इसे संतुलित करने के लिए इनको चटनी और दही के साथ सर्व कीजिये, स्वाद के साथ स्वास्थ भी अच्छा रहेगा।

मैं गर्मियों के दिनों में व्रत आहार के नाश्ते के रूप में कुट्टू की पकोड़ी के साथ छाज या लस्सी को सर्व करती हूँ जिससे व्रत के दौरान पेट भी भर जाता है और एनर्जी भी मिल जाती है।

कूटू क्या है :-

कूटू एक प्रकार का जंगली पौधा है जिसके बीज को पीसकर एक आटा बनाया जाता है। यह भारत के अतिरिक्त चीन, जापान और कोरिया में खाया जाता है। कूटू ना तो असली अनाज है और ना ही वनस्पति परिवार में घास परिवार का सदस्य है। भारत में कोट्टु को पवित्र फलाहार माना जाता है और इसके आटे को व्रत का आटा कहते हैं।

कुट्टू का आटा खाने के फायदे :-

कोट्टु में ग्लूटीन नही होता है, अतः यह उनके लिए भी उत्तम भोजन है जिन्हें ग्लूटेन से एलर्जी है या सीलियक रोग है।

कुट्टू 75 फीसदी काबोहाइड्रेट और 25 फीसदी हाई क्वालिटी प्रोटीन वाला अनाज है। जिससे कुट्टू का सेवन वजन कम करने में बहुत मदद करता है।

यह अघुलनशील फायबर का बहुत अच्छा स्रोत है इसलिए कुट्टू सेवन के बाद काफी समय तक हमारा पेट भरा रहता है।

कुट्टू के आटे का ग्लिसेमिक इंडेक्स 47 होता है और इसमें फाइबर अधिक होता है इसलिये इसका सेवन मधुमेह रोगी के लिये बहुत फायदेमंद है।

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Recipe Summary:-

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2 Responses

  1. Rekha Goel

    Nice recipe

    (5/5)
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  2. Satyendra

    Thanks for sharing this recipe.

    (5/5)
    Reply

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